माधोस जवानी की धूमधाम निशा, जवानी की एक सुंदर लड़की, अपने कमरे में बैठी हुई है। उसका चेहरा निखरा हुआ है और उसकी आंखों में जीवन और उत्साह की चमक है। निशा (सोच में) - ज़िंदगी बहुत हसीं है! अब यही समय है मैं अपनी जवानी का लुफ़्त उठाऊं। निशा कॉलेज कैम्पस में आती है, उसकी पायलेट्स गुंजाती हैं और उसकी दोस्तों के साथ हंसती-खेलती है। वह अपने युवाओं के दिनों का आनंद लेती है। निशा के दोस्त एक पार्टी में बुलाते हैं। पार्टी में धूमधाम होती है, नाच-गाने और मज़े की भरमार होती है। निशा एक युवक, रोहित, से मिलती है और उनके बीच में एक आकर्षण हो जाता है। निशा और रोहित उसके कमरे में एक-दूसरे के साथ बातें करते हैं। उनकी नई प्यार भरी बातों में खो जाती हैं और वे एक-दूसरे के संग मस्ती और रोमांस का आनंद लेते हैं। निशा के पिताजी निशा को रोज़ रात में घर से निकलते हुए देखते हैं। उन्हें चिंता होती है और उन्हे अपने गलत कामों की संज्ञा होती है। निशा रोहित के पास जान...
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निशा जवान और होंठ रसीले थे निशा जवानी की एक सुंदर लड़की थी। उसके बाल लम्बे, आँखें काली, और होंठ रसीले थे। उसकी हंसी और मुस्कान सभी को मोह लेती थी। वह अपनी खुद की दुनिया में खोई रहती थी, खुशियों और सपनों से भरी। एक दिन उसे अपने दोस्तों की एक पार्टी में बुलाया गया। पार्टी में मस्ती थी, नाच-गाने और आनंद का माहौल छाया हुआ था। वहां पर निशा को एक युवक ने देखा और वह उसके दिल में तेजी से समा यी। उस युवक का नाम रोहित था, वह भी निशा से प्यार करने लगा। दोनों एक-दूसरे के साथ बात करने लगे और वक्त बिताने लगे। वे दिन-रात एक-दूसरे के साथ बातें करते और मिलने के लिए सोचते रहते थे। प्यार के आगे, जवानी की उमंग और अविवाहित भावना की बाधा आ गई। निशा और रोहित एक-दूसरे के वचनों में बिस्वास करने लगे। अपनी अजनबी जगह और नई प्यार की मधुर बातों में खोए हुए, उन्होंने अपने परिवार और जिम्मेदारियों को भूल गए। प्यार की मग्गी ने निशा को रोक लिया था, और उसे गलत रास्ते पर ले जाने लगी। वह रोज़ रात में घर से बहाने बनाती, झूल बनाती और रोहित के साथ छुपकर मिलने निकल जाती। धीरे-धीरे, उसके जीवन ...